कुछ झूठे लोग, आ़ला ह़ज़रत इमाम अह़मद रज़ा ख़ान (अ़लैहिर्रह़मह) पर ये इल्ज़ाम लगाते हैं कि उन्होंने ज़मीन को चपटी कहा है. जबकि इनका पूरा गैंग मिलकर भी इस बात को, इमामे अहले सुन्नत की किताबों से साबित नहीं कर सकता;
मैं पहले भी इस टॉपिक पर दो तह़रीरें लिख चुका हूं, जिनमें मैंने इमाम की सिर्फ़ एक किताब से ह़वाला दिया था कि इमाम ने स़राह़तन् ज़मीन को ‘कुरवी (गोल)’ कहा है. अब मुझे दो हवाले मज़ीद मिले हैं, तो आपके साथ शेयर कर रहा हूं:
1. अपनी किताब: ‘क़वारिउ़ल् क़ह्हार अ़लल् मुजस्सिमतिल् फ़ुज्जार (1318 हि.)’ की ज़र्ब नं. 94 में लिखते हैं:
“और, अर्-स़ादे स़ह़ीह़ा मुतवातिरह ने साबित किया है कि आसमान व ज़मीन, दोनों गोल, बशक्ले कुरह (spherical) हैं…”
📙फ़तावा रज़विय्यह, जिल्द नं. 29, पेज नं. 162, पब्लिकेशन: रज़ा फाउंडेशन (लाहौर)
ये हवाला मैंने अपनी पिछली दोनों तह़रीरों में दिया था. अब दो नए ह़वाले पेश करूंगा, जिनमें एक तो मज़्कूरा रिसाले से ही है, जबकि दूसरा दूसरी किताब से;
2. अपनी मज़्कूरा किताब: ‘क़वारिउ़ल् क़ह्हार अ़लल् मुजस्सिमतिल् फ़ुज्जार (1318 हि.)’ की ज़र्ब नं. 92 में लिखते हैं:
“ज़मीन कुरवी, यानी गोल है…”
📙फ़तावा रज़विय्यह, जिल्द नं. 29, पेज नं. 160, पब्लिकेशन: रज़ा फाउंडेशन (लाहौर)
3. अपनी किताब: ‘हिदायतुल् मुतआ़ल फ़ी ह़द्-दिल् इस्तिक़बाल (1324 हि.)’ में लिखते हैं:
“لكون الأرض كرة”
“…क्यूंकि ज़मीन कुरवी, यानी गोल है…”
📙फ़तावा रज़विय्यह, जिल्द नं. 6, पेज नं. 99, पब्लिकेशन: रज़ा फाउंडेशन (लाहौर)
ऐसी स़ाफ़ इ़बारतें होने के बावजूद भी अगर कोई इमामे अहले सुन्नत पर इल्ज़ाम लगाता है, तो वो ज़रूर दिल से अंधा होगा.
नोट: स्कैन पेज साथ में लगा रहा हूँ.
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मुह़म्मद क़ासिमुल् क़ादिरी अल्-अज़्हरी
26/01/26 ई.