शीआ़ बिरादरी का मुख़्तस़र ख़ाका

बुनियादी तौर पर इनके तीन ग्रुप्स हुए:

(1) ग़ुलात
(2) ज़ैदिय्यह
(3) इमामिय्यह

फिर ‘ग़ुलात’ अठारह ग्रुप्स में बंटे:

(1) सबाइय्यह
(2) कामिलिय्यह
(3) बन्नानिय्यह या बयानिय्यह
(4) मुग़ीरिय्यह
(5) जनाह़िय्यह
(6) मन्स़ूरिय्यह
(7) ख़त़्त़ाबिय्यह
(8) ग़ुराबिय्यह व ज़ुबाबिय्यह
(9) ज़म्मिय्यह
(10) हिशामिय्यह {इनके तीन और नाम हैं}
(11) ज़ुरारिय्यह
(12) यूनुसिय्यह
(13)शैत़ानिय्यह
(14) रज़्ज़ामिय्यह
(15) मुफ़व्विज़ह
(16) बद्इय्यह
(17) नुस़ैरिय्यह व इस्ह़ाक़िय्यह
(18) इस्माई़लिय्यह {इनके सात और नाम हैं, और इनके अंदर भी 8-9 ग्रुप्स हैं जिनमें से एक ‘बोहरा’ है}

फिर ‘ज़ैदिय्यह’ के बुनियादी तीन ग्रुप्स बने:

(1) जारूदिय्यह
(2) सुलैमानिय्यह
(3) तबीरिय्यह

रहा ‘इमामिय्यह’, तो इनके भी तक़रीबन 8-9 ग्रुप्स बने, जिनमें से ‘इस्ना अ़शरिय्यह’ हैं, जो 12 इमामों वाले हैं…!

ह़ुदूसुल् फ़ितन् व जिहादु अअ़यानिस् सुनन, [लिश् शैख़ मुह़म्मद अह़मद अल्-मिस़्बाह़ी (ह़फ़िज़हुल्लाहु व रआ़हु)], पब्लिकेशन: दारुल् कुतुबिल् इ़ल्मिय्यह (बेरूत)

इन्हीं ‘इस्ना अ़शरिय्यह’ के रद में हज़रत शाह अ़ब्दुल् अ़ज़ीज़ मुह़द्-दिसे देहलवी (रद़ियल्लाहु अ़न्हु) ने अपनी मश्हूर किताब: ‘तुह़्फ़ा ए इस्ना अ़शरिय्यह’ लिखी थी.
______________
मुह़म्मद क़ासिमुल् क़ादिरी अल्-अज़्हरी
24/01/21 ई.